पातंजल योगसूत्र में यम / Yama in Patanjali's Yoga Sutras

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Dr Kashyap M Trivedi

Abstract

अष्टांग योग में यमादि आठ अंगो में से यहा प्रथम अंग यम का निरुपण किया है । अहिंसाए सत्यए अस्तेयए ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यह पांच यम है । योग में वर्तमान समय में लोको द्वारा योग किया जाता हैं ए उसमें यम.नियम का पालन सुचारु रूप से नहीं किया जाता हैं ए अतः यहां सत्यए अहिंसा आदि पांच यमों का महत्त्व दर्शाया गया है ।
मुख्य शब्दः रू. यमए अहिंसाए सत्यए अस्तेयए ब्रह्मचर्यए अपरिग्रह
उदेश्य रू उदेश्य यह है कि अधिकतर लोग योग में मात्र आसनए प्राणायामादि से संलग्न रहते हैं । आसानादि का शारीरिकए मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिये आचरण आवश्यक है। यह आचरण की बात यम.नियम में कही गई है । अतः लोकों का ध्यान इस आचरण की और आकृष्ट करने का उदेश्य है ।


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In Ashtanga Yoga, out of the eight limbs Yamadi, here the first limb is represented as Yama. Ahimsa, Satya, Asteya, Brahmacharya and Aparigraha are the five Yamas. In the present time yoga is done by the lokas, in that the yamas-niyama is not followed smoothly, so here the importance of five yamas like truth, non-violence etc. has been shown.


 

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Author Biography

Dr Kashyap M Trivedi, KSKV kacch University , Bhuj , Kacch , Gujrat , India

Sanskrit Department

How to Cite

पातंजल योगसूत्र में यम / Yama in Patanjali’s Yoga Sutras. (2022). Haridra Journal, 3(09), 25-32. https://doi.org/10.54903/haridra.v3i09.11386

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