पातंजल योगसूत्र में नियम / "Niyama" in Patanjala Yogasutra

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Dr Kashyap M Trivedi

Abstract

अष्टांग योग में आठ अंग का महत्त्व दर्शाया गया है । यहाँ दूसरे अंग ‘नियम’ का निरुपण किया गया है । शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वरप्रणिधान यह पाँच नियम हैं । वर्तमान में लोगों द्वारा योगासानादि किये जाते हैं, अपितु यम – नियम का पालन नहीं किया जाता, अतः यहाँ शौचादि नियमों का निरुपण किया गया है
//
The importance of eight limbs has been shown in Ashtanga Yoga. Here the second part 'rule' has been explained. Purification, contentment, penance, self-study, devotion to God are the five rules. At present Yogasanadis are performed by the people, but Yama-Niyamas are not followed, so here Shauchadi Niyamas have been formulated.

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Author Biography

Dr Kashyap M Trivedi , Asst Professor

Department of Sasnkrit ,

K.S.K.V Kutch University ,

Bhuj - Kutch 370001

India

How to Cite

पातंजल योगसूत्र में नियम / "Niyama" in Patanjala Yogasutra. (2022). Haridra Journal, 3(10), 13-20. https://doi.org/10.54903/haridra.v3i10.11389

References

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विष्णुस्मृति – sa.wikisource.org/wiki/विष्णुस्मृति:/पञ्चपञ्चासत्तसोऽध्याय:

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